पूरी दुनिया को कोरोना वायरस ने हाई डेफिनिशन से धुँधले स्टैंडर्ड डेफिनिशन वीडियो मोड में बदल दिया है। हवाई जहाज से लेकर टेलीविज़न सीरियल तक हर चीज एवं उसके द्वारा दी जाने वाली सेवाओं पर काफी प्रभाव पड़ा है |
भारत भी इस कोरोना महामारी से अछूता नहीं है तथा भारत सरकार ने इससे निपटने के लिए 21 दिन का देशव्यापी लॉक डाउन कर दिया है यह नजरबंदी हमारी अपनों सुरक्षा के लिए सरकार ने सुनिश्चित की है |

You tube एवं Netflix नहीं देगा HD वीडियोस

भारत के 21 दिनों के लॉक डाउन ने इंटरनेट सेवा प्रदाताओं, बैंकिंग सेवाओं, ऑनलाइन मनोरंजन सेवा जैसी विभिन्न ऑनलाइन सेवा प्रदाताओं पर तनाव बढ़ा दिया है। एक औसत व्यक्ति ने पिछले ५ दिनों में अपने इंटरनेट के उपयोग को काफी बड़ा दिया है।

कौन है इंटरनेट के सबसे ज्यादा उपयोगकर्ता

  • ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म (भारत में अधिकांश छात्र ऑनलाइन स्टडी के लिए यू-ट्यूब पर निर्भर हैं)
  • मनोरंजन प्लेटफार्म (नेटफ्लिक्स, अमेज़न प्राइम, वीमो आदि)
  • वित्तीय संस्थाए
  • मोबाइल एप्लिकेशन (टिकटॉक, हेलो, ऑनलाइन गेम, ऑनलाइन कक्षाएं आदि)
  • स्मार्ट टीवी

कोरोना महामारी के प्रकोप ने सम्पूर्ण देश के घरे को पूरे दिन के लिए टीवी थिएटर में तब्दील कर दिया है|  लोग दिन भर टीवी, मोबाइल एवं कंप्यूटर से चुपके पड़े है तथा इसी के चलते इंटरनेट का उपयोग पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है इस बड़े हुए उपयोग में काम, उपयोगिता और मनोरंजन शामिल है जिसके चलते एक आदमी आदमी का दैनिक इंटरनेट उपयोग बढ़ गया है |

हाल ही में Google ने घोषणा की थी कि वह यूरोपीय क्षेत्र में स्टैंड वीडियो फॉर्मेट को YouTube के सभी वीडियो पर अस्थायी रूप से डिफ़ॉल्ट मोड कर रहा है , लेकिन जल्द ही इसे वैश्विक स्तर पर बदलाव के रूप में शामिल कर दिया, यहां तक ​​कि Google के एक आधिकारिक बयान के अनुसार कहा गया की कंपनी ‘सरकारों के साथ मिलकर काम कर रही है और कोरोना वायरस की इस अभूतपूर्व स्थिति के दौरान नेटवर्क ऑपरेटर सिस्टम पर तनाव को कम करने के लिएहम हमारे हिस्से का काम वीडियो क्वालिटी को कम करके कर रहे है ।

दुनिया की सबसे बड़ी टेक दिग्गज गूगल के अलावा, Netflix जो की एक ऑनलाइन मनोरंजन प्रदाता है ने अगले 30 दिनों के लिए अपने बैंडविड्थ में 25% कमी की घोषणा की है । इस स्ट्रीमिंग बैंडविड्थ कम करने से इंटरनेट के उपयोग में कमी आएगी और इंटरनेट सेवा प्रदाताओं पर बोझ कम होगा और वे अपने उपयोग पर 20% तक प्रति उपयोगकर्ता उपयोग बढ़ने पर भी अपनी सेवाओं को अधिक प्रभावी ढंग से जारी रख पाएंगे।

सामान्यतया एक घंटे की स्टैंडर्ड डेफिनिशन वीडियो (एसडी) में लगभग 1 GB डेटा इस्तेमाल होता है, जबकि HD वीडियो एक घंटे में 3 GB तक इस्तेमाल कर सकता है। इसलिए वीडियो प्रारूप को स्टैंडर्ड डेफिनिशन में बदलकर बैंडविड्थ पर 33% की कमीलायी जा सकती है |

वीडियो की गुणवत्ता पर क्या प्रभाव पड़ता है

बैंडविड्थ में कमी (एचडी से एसडी पर वीडियो प्रारूप स्विचिंग) निश्चित रूप से वीडियो की गुणवक्ता एवं उपयोगकर्ता के अनुभव की गुणवत्ता को कम कर देगा, लेकिन निश्चित रूप से देशव्यापी बंद के दौरान भी इंटनेट सेवाओं की सहजता की संभावना को काफी हद तक बढ़ा देगा ।

Google एवं Netflix द्वारा उठाए गए बैंडविड्थ में कमी के उपायों को बिना किसी व्यवधान के इंटरनेट सेवाएं प्रदान करने के राष्ट्रीय सरकार के दृढ़ संकल्प के रूप में देखा जाना चाहिए ताकि बुनियादी कार्यों को नुकसान न हो।

एक साधारण इंटरनेट उपयोगकर्ता को क्या करना चाहिए

देशव्यापी लॉक डाउन की स्थिति दुनिया में कहीं भी सामान्य नहीं होती है। कोरोना महामारी से अपने नागरिकों को सुरक्षित रखने के लिए सरकार और कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा लिया गया यह एक चरम उपाय है। एक साधारण इंटरनेट उपयोगकर्ता के रूप में हम भी अपने इंटरनेट उपयोगकर्ता पैटर्न को बदलकर अपना योगदान दे सकते है । सभी वीडियो प्लेटफ़ॉर्म की मूल गुणवत्ता को स्टैण्डर्ड मोड पर स्विच करें ताकि ISP पर तनाव का स्तर कम हो जाए और इनटरनेट प्रदाता बिना किसी व्यवधान के अपनी सेवाएं निर्बाध रूप से आम लोगो तक इस बंद की स्थिति में पहुंचा सके |

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