अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष प्रमुख क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने घोषणा की है कि विश्व अर्थव्यवस्था ने वैश्विक मंदी में प्रवेश कर लिया है । आईएमएफ ने वर्ष 2020 और 2021 के लिए विकास की संभावनाओं के विश्लेषण करने के बाद यह बयान जारी किया है | पिछली वैश्विक मंदि का सबसे बड़ा प्रभाव वर्ष 2009 से लेकर 2010 तक रहा |

वैश्विक आर्थिक मंदी 2020

अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के सभी 189 सदस्य देशों के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा के बाद IMF ने वैश्विक मंदी की पुष्टि की है । कोरोना वायरस ने वर्ष 2020 के लिए नकारात्मक वैश्विक विकास की गति को कई गुना बढ़ा दिया है। दुनिया भर के 150 से अधिक देशों को COVID-19 महामारी के कारण अपने अस्तित्व केगंभीर खतरे का सामना करना पड़ रहा है | लगभग सारा विश्व लॉक डाउन के दौर से गुजर रहा है | इस कोरोना महामारी के चलते विश्व अर्थव्यवस्था मंदी के एक अनिश्चित कालीन भंवर में फस गयी है |

वैश्विक मंदी शुरू होने का कारण क्या है ?

मंदी किसी भी व्यापार चक्र की एक बहुत ही सामान्य घटना है। हर 8 से 10 साल में मंदी की यह प्रक्रिया होती है और अपने आप ठीक हो जाती है। हम सभी लोग वैश्विक आर्थिक मंदी की उम्मीद कर रहे थे एवं इसी बीच सभी देश घटते व्यापार और कम होती आर्थिक गतिविधियों पर काबू पाने की पूरी कोशिश कर रहे थे । कोरोना वायरस महामारी को वैश्विक मंदी 2020 का एक उत्प्रेरक कहा जाता सकता है। अमेरिका ने चीन पर कई गंभीर आरोप लगाये है और खा है की चीन दुनिया को शुरू से ही कोरोना महामारी के बारे में नहीं बता रहा है कुछ समय के लिए चीन ने इस महामारी को दबाने की भी नाकाम कोशिश की। जब स्थिति चीन के हाथों से बाहर हो गई, तो उन्होंने अन्य राष्ट्रों के लिए एक सलाह जारी की, परन्तु इससे पहले की यह देश कुछ कर पाते बहुत देर हो चुकी थी । अगर हम एक पंक्ति में यह सब संक्षेप में कहना चाहते हैं तो हम कह सकते हैं कि चीन से शुरू हुयी कोरोना महामारी वैश्विक आर्थिक मंदी 2020 का कारण बनी है |

वैश्विक मंदी की अवधि 2020

हम सभी एक वैश्विक मंदी से डर रहे थे जो पिछले 6 महीनों से हमारे दरवाजे पर खड़ी थी लेकिन कोरोना महामारी ने 150 से अधिक देशों में सभी आर्थिक गतिविधियों को रोककर इसका प्रभाव कई गुना बढ़ा दिया है। हम सम्भावना व्यक्त की जा रही है की इसका काफी गहरा असर होगा और प्रभावित देशों को इसके रोकथाम के उपायों को आक्रामक तरीके से करने की जरुरत है ताकि हम अर्थव्यवस्था में होने वाले गतिरोध को कम करके वैश्विक मंदी की अवधि को घटा सकें|इसकी अवधि 1 साल से लेकर एक दशक तक हो सकती है क्योकि यह अवधि मंदी को कम करने के उपायों की कारगरता पर निर्भर करती है |

वैश्विक मंदी के संकेतक

अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने 8 प्रमुख मंदी संकेतकों के आधार पर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इन संकेतकों के गहरे राजकोषीय प्रभाव का विश्लेषण किया है तथा विश्व अर्थव्यवस्था को मंदी के रूप में घोषित किया है । किसी भी व्यक्ति के व्यक्तिगत अनुभव और विश्लेषण के आधार पर मंदी की घोषणा नहीं किआ जा सकती है । IMF ने आर्थिक मंदी के विश्लेषण के लिए नीचे दिए गए कारको को चुना है |

वैश्विक अर्थव्यवस्था का विश्लेषण करने के लिए मंदी के सूचक आईएमएफ उपयोग की सूची।

  1. शुद्ध उधार / उधार
  2. प्राथमिक शुद्ध उधार
  3. चक्रीय समायोजित संतुलन
  4. चक्रीय समायोजित प्राथमिक संतुलन
  5. राजस्व
  6. व्यय
  7. सकल ऋण स्थिति
  8. शुद्ध कर्ज

आईएमएफ ने उपर्युक्त कारको के आधार पर प्रत्येक विश्व अर्थव्यवस्था को विश्लेषित किया है और प्रत्येक संकेतक के प्रभाव का विश्लेषण अन्य देशों पर भी किया है। मंदी के संकेतक डेटा की विस्तृत जानकारी के लिए कृपया आईएमएफ की आधिकारिक वेबसाइट पर जाये पर जाएं।

मंदी का प्रभाव

मंदी के बारे में एक बड़ी चिंता का विषय विश्व अर्थव्यवस्था के अचानक बंद होने एक लम्बा प्रभाव देखने को मिलेगा जिसमे कंपनियों के दिवालिया होने और कर्मचारियों की छंटनी की लहर चलने का जोखिम शामिल है जो न केवल अर्थव्यस्था के वापस पटरी के आने की सम्भावना को कम करता है बल्कि हमारे समाजों के सामंजस्य को भी प्रभावित करता है। किसी भी वैश्विक मंदी के प्रमुख प्रभावों को निम्नलिखित बिंदुओं के साथ देखा जा सकता है

  • बेरोजगारी
  • घटे हुए व्यापार और वस्तुओं का उत्पादन में कमी
  • सकल घरेलु उत्पाद (जीडीपी) में गिरावट
  • बढ़ी हुई महंगाई
  • सामाजिक विकास और स्वास्थ्य योजनाओं पर सीमित खर्च

कौन से देश सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे

आईएमएफ चीफ द्वारा जारी एक बयान में कहा है कि अमेरिका पहले ही मंदी के दौर से गुजर रहा है साथ ही साथ दुनिया की बाकी उन्नत अर्थव्यवस्थाएं भी इस दौर में आ गयी हैं। उभरते और विकासशील देश जो अभी तक कोरोना वायरस महामारी से प्रभावित नहीं हुए है के आर्थिक विकास की संभावनाओं पर भी गंभीर प्रभाव पड़ेगा तथा वो भी आर्थिक मंदी से बच नहीं पाएंगे । आईएमएफ अभी भी इस वैश्विक मंदी के समग्र प्रभाव को विश्लेषण करके एक ठोस नतीजे पर काम कर रहा है | आर्थिक मंदी का यह डोर उच्च आबादी वाले देशों के लिए विशेष रूप से कड़ी परीक्षा की घडी की तरह साबित होगा ।

मंदी से बाहर आने के उपाय

मंदी से बाहर आने के लिए कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश या रोड मैप नहीं होता है। लघु एवं छोटी व्यापार इकाइयों और निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए बड़े पैमाने पर किफायती सुधार और सरकार की नीतियां किसी भी अर्थव्यवस्था के तेजी से पुनरुद्धार के लिए महत्वपूर्ण हैं। आर्थिक विविधीकरण किसी भी अर्थव्यवस्था के तेजी से सुधार के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। किसी भी देश को अपने सकल घरेलू उत्पाद में योगदान के लिए किस एक स्त्रोत की बजाय विभिन्न छोटे छोटे स्त्रोतों पर काम करना चाहिए । किसी भी अर्थव्यवस्था को मंदी से बाहर लाने के लिए यही सबसे चर्चित एवं कारगर उपाय है |

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