भारत के सर्वोच्चय न्यायलय ने हाल ही में भारतीय दूरसंचार कंपनियों को अपने समायोजित सकल राजस्व (AGR) का भुगतान नहीं करने की की एवज़ में कड़ी चेतावनी दी है, जो 17 मार्च 2020 शाम तक 1. 2 लाख करोड़ रुपये भुगतान से सम्बंधित है । दूरसंचार कंपनियों के अलावा SC ने दूरसंचार विभाग को भी दूरसंचार कंपनियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू नहीं करने एवं अदालत के फैसले की अवमानना ​​के लिए फटकार लगायी है ।

भारतीय दूरसंचार कंपनियों के एजीआर भुगतान का मामला क्या है?

दूरसंचार क्षेत्र को राष्ट्रीय दूरसंचार नीति, 1994 के तहत उदारीकृत किया गया था जिसके बाद एक निश्चित लाइसेंस शुल्क के बदले में कंपनियों को लाइसेंस जारी किए गए थे। स्थिर निर्धारित लाइसेंस शुल्क से राहत प्रदान करने के लिए, सरकार ने 1999 में लाइसेंसधारी दूर संचार कंपनियों को राजस्व साझाकरण शुल्क मॉडल पर काम करने का एक विकल्प दिया, जिसमें मोबाइल टेलीफोन ऑपरेटरों को वार्षिक लाइसेंस के रूप में सरकार के साथ अपने समायोजित सकल राजस्व AGR का एक प्रतिशत लाइसेंस शुल्क (LF) और स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क (SUC) के रूप में साझा करना आवश्यक था । दूरसंचार विभाग (DoT) और दूरसंचार कंपनियों के बीच लाइसेंस समझौते बाद के सकल राजस्व को परिभाषित करते हैं। एजीआर की गणना इन लाइसेंस समझौतों में की गई कुछ कटौती के लिए अनुमति देने के बाद की जाती है। इस व्यवस्था के लिए लाइसेंस शुल्क और स्पेक्ट्रम, शुल्क क्रमशः 8% और 3-5% निर्धारित किए गए थे।

सरकार और टेलीकॉम कंपनियों के बीच क्या है विवाद?

सरकार और दूरसंचार कंपनियों के बीच विवाद AGR की गणना को लेकर है, दोनों पक्ष AGR की परिभाषा के अपने अपने संस्करण के साथ चिपके हुए हैं तथा उसके हिसाब से गणना कर भुगतान लेना एवं प्राप्त करना चाहते है | भुगतान की राशि इतनी बड़ी है की दोनों पक्ष इस मामले को हल्के में नहीं लेना चाहते है |

  • सरकार की AGR गणना की परिभाषा – सरकार के अनुसार, AGR में दूरसंचार और गैर-दूरसंचार दोनों सेवाओं से सभी राजस्व (छूट से पहले) शामिल हैं |
  • टेलीकॉम कंपनी की AGR गणना की परिभाषा – टेलीकॉम का कहना है कि AGR में कोर टेलीकॉम सेवाओं से अर्जित राजस्व शामिल होना चाहिए, न कि किसी निवेश या अचल संपत्ति की बिक्री पर लाभांश, ब्याज आय तथा लाभ को शामिल किया जाना है |

AGR राजस्व का वित्तीय निहितार्थ 1.2 लाख करोड़ रुपये है, इसलिए सरकार और टेलीकॉम कंपनी दोनों इस टैक्स की लड़ाई को हारना नहीं चाहते हैं।

AGR भुगतान मामले में प्रमुख दूरसंचार कम्पनियाँ कौन कौन हैं?

उपभोक्ता एवं राजस्व के मामले में भारत सबसे बड़े दूरसंचार बाजारों में से एक है, 2016 तक सभी दूरसंचार कम्पनियाँ अच्छे मुनाफे पर काम कर रही थी लेकिन जब से रिलायंस जियो ने 2016 में अपनी सेवाओं डेटा और वॉयस कॉलिंग भारी रियायती कीमतों से शुरुआत की है यह अन्य सभी टेलीकॉम कंपनियों के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं है सुप्रीम कोर्ट के द्वारा तुरंत AGR भुगतान करने के अन्यथा कंपनियों को उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई के दायरे में आने वाली कम्पनियाँ निम्न प्रकार है |

  1. वोडाफोन आइडिया- 53,039 करोड़ रुपये देय
  2. भारती एयरटेल- 35,586 करोड़ रुपये देय
  3. टाटा टेली सर्विसेज – 13,823 करोड़ रुपये देय

सभी तीन कंपनियों का AGR संबंधित बकाया राशि में 1.02 लाख करोड़ का बकाया है। आपको बता दे की लिस्ट में सूचित टाटा टेली सर्विसेस कंपनी का एयरटेल में विलय हो चूका है इसलिए इस कंपनी की सारी पूर्व भुगतान सम्बन्धी जिम्मेदारी एयरटेल उठायेगा | सर्वोच्चय न्यायलय का निर्णय आने के बाद एयरटेल रुपये के भुगतान करने की पुष्टि करता है तथा DoT में 20 फरवरी तक 10,000 करोड़ और बाकी लंबित राशि को 17 मार्च की समयसीमा तक जमा करवाने की आधिकारिक घोषणा की है । वोडाफोन इंडिया का कहना है कि अगर भारत सरकार इस मामले में कोई राहत नहीं देती है तो वह भारत में अपने सेवाओं को बंद कर देगी।

दिलचस्प बात यह है कि भारतीय टेलीकॉम बाजार की नई राह को प्रशस्त करने और अपना रास्ता साफ़ रखने के लिए 23 जनवरी 2020 की सुनवाई से ही पहले रिलायंस जियो ने अपने सभी भुगतान कर दिए थे ।

इस कानूनी लड़ाई का अपेक्षित परिणाम क्या है?

विभिन्न उद्योगों से जुड़े कानूनी विशेषज्ञ इस स्थिति को भारतीय दूरसंचार व्यवसाय के लिए बहुत कठिन और चुनौतीपूर्ण मानते हैं। दूरसंचार विभाग (DoT) कि AGR भुगतान को कोई अगली तारीख देने के मूड में नहीं है क्योंकि यह पहले ही कई बार किया चुका है एवं स्थिति ज्यो की त्यों बनी हुयी है ।

वोडाफोन आइडिया एक मात्र ऐसी कंपनी बची है जो यह भुगतान नहीं करना चाह रही है क्योंकि एयरटेल पहले ही 17 मार्च 2020 तक अपने एजीआर बकाया भुगतान की योजना कर चूका है।

वोडाफोन इंडिया के लिए इस मुद्दे को निपटाने के लिए केंद्र सरकार का हस्तक्षेप ही एकमात्र उम्मीद बची है अन्यथा वोडाफोन आइडिया को अपने परिचालन को बंद करना होगा जिससे की भारतीय दूरसंचार बाजार में Oligopoly जैसी एक नई स्थिति पैदा हो जायेगी |

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