कोरोना महामारी मानव जाति के लिए किसी भयानक सपने से कम नहीं है जो खत्म होने का नाम हि नहि ले रहा है । इस महामारी ने सम्पूर्ण पृथ्वी को अपने अधिकार क्षेत्र में कर रखा है | इस विश्व के सुपरपावर और आर्थिक महाशक्ति कहे जाने वाले देश भी कोरोना के सामने बौने एवं असहाय महसूस कर रहे हैं। राष्ट्रव्यापी बंद , सामाजिक दुरी और अलगाव की स्थिति है। वैश्विक अर्थव्यवस्था से लेकर मानव जाति के अस्तित्व तक सब कुछ दांव पर है।

क्या हम एक साधारण स्वास्थ्य समस्या से पार पा रहे हैं?

सरकार और जन साधारण की तीव्र तरह की प्रतिक्रियाओं ने स्थिति से निपटने एवं इसके समुचित उपचार के बारे में कुछ सवाल उठाए हैं। क्या हम एक सामान्य स्वास्थ्य समस्या को कुछ ज्यादा ही तूल देकर इसे मौत का सीधा फरमान बता रहे हैं या सिर्फ मीडिया ने समय के साथ इसके रूप को और भी भयावह बना दिया है ?

आइए पहले इस बीमारी को समझने के लिए इस पूरे परिदृश्य को समझने की कोशिश करें और फिर डब्ल्यूएचओ और अन्य अनुसंधान फर्मों द्वारा दिए गए डेटा के साथ मीडिया द्वारा बनाये गए इस दानव का सामना करें।

वास्तव में कोरोना-वायरस बीमारी क्या है?

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार कोरोनावायरस रोग (COVID-19) एक संक्रामक रोग है जो एक नए खोजे गए कोरोनावायरस के कारण होता है। COVID-19 वायरस से संक्रमित अधिकांश लोग हल्के से मध्यम श्वसन बीमारी का अनुभव करेंगे और विशेष उपचार की आवश्यकता के बिना ठीक हो जाएंगे। वृद्ध लोगों, और हृदय रोग, मधुमेह, पुरानी श्वसन बीमारी और कैंसर जैसी अंतर्निहित चिकित्सा समस्याओं वाले लोगों में गंभीर बीमारी विकसित होने की अधिक संभावना है। तो अब आपके पास इस बीमारी का एक प्रामाणिक रिकॉर्ड है कि यह मामूली से मामूली हानिकारक बीमारी है फिर इसके बारे में इतना फ़िज़ूल का जीवन एवं मृत्यु वाला ड्रामा क्यों?

अन्य वायरस के साथ कोरोना वायरस की गंभीरता की तुलना

कोरोना रोग की गंभीरता को समझने के लिए, हमने WHO, CDC (अमेरिका ) और कुछ स्वतंत्र अनुसंधान संगठन से डेटा लिया है। हमने 4 कारकों के आधार पर 5 सबसे घातक और प्रसिद्ध वायरसो की तुलना की है जो मानव स्वास्थ्य और जनसांख्यिकी पर इसके प्रभाव को समझने के लिए महत्वपूर्ण हैं।

उपरोक्त तालिका कोरोना वायरस की एक चौंकाने वाली तस्वीर दिखाती है सरकारी अधिकारियों एवं मीडिया द्वारा इसे इतनी बड़ी कवरेज देने के लिए सवाल करती है। अगर हम कोरोना वायरस के घातक(मृत्युदर ) होने की बात करें तो इसका 2 से 3% ही है जो उन लोगों के लिए है जो पहले से ही किसी तरह की बीमारी से पीड़ित हैं। एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में संचरण की संभावना भी मध्यम है।

इस वायरस के बारे में एक भयावह बात यह है कि हमारे पास अभी तक कोई टीकाकरण नहीं है और यदि किसी रोगी को गंभीर लक्षण विकसित करता है तो इलाज पूरी तरह से स्व-प्रतिरक्षण या गहन चिकित्सकीय देखभाल सुविधा पर निर्भर है।

दुनिया भर में मौत के शीर्ष 10 रोग

विश्व स्वास्थ्य संगठन के 2019 के स्वास्थ्य आंकड़ों के अनुसार, हर साल लगभग 1करोड़ लोग दिल के दौरे के कारण मरते हैं। दुनिया भर में मौत के शीर्ष 10 कारणों की सूची निम्नलिखित है |

टीबी और मधुमेह जैसे रोग हर साल लगभग 40 लाख लोगों को मारते हैं जो दवाओं के माध्यम से उपचार किये जा सकते है अथवा नियंत्रणीय है। दुनिया की कुल आबादी का लगभग 1% (WHO को 5.6 करोड़ मौतें) हर साल इन बीमारीयो के कारण मर जाती हैं।

आज तक कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया में 16.2 लाख लोगों को संक्रमित किया है, अब तक 1,08,80 मौतें दर्ज की गई हैं, कोरोना वायरस की इस समय वास्तविक मृत्यु दर 6% के आसपास आ रही है और लगभग 23% रोगी इस बीमारी से स्व प्रतिरक्षा द्वारा उबर रहे हैं ।

यदि हम नियमित रूप से शीर्ष 10 रोगों तथा कोरोना वायरस के कारण होने वाली मृत्यु के आंकड़ों का विश्लेषण करते हैं, तो यहां हमें फिर से सरकारों और अन्य स्वास्थ्य संगठनों द्वारा कोरोना वायरस के लिए बनाई गई हिस्टीरिया पर सवाल उठता है। हम उन बीमारियों को कम महत्वपूर्ण दे रहे हैं जो अन्य किसी बीमारी की तुलना में सबसे अधिक मौतों का कारण बनती है परन्तु कोरोना के बारे में एक चिंताजनक बात यह है की इसका इलाज स्व-प्रतिरक्षित द्वारा किया जा सकता है।

उपरोक्त विश्लेषण के माध्यम से हम कोरोना रोग की गंभीरता को कम करके नहीं आंक रहे हैं, लेकिन इसने बीमारी की रोकथाम के लिए किये जा रहे प्रयासों ने हमारे दैनिक जीवन में कोरोना से अधिक गंभीर स्थितियों का निर्माण किया है जो कोरोना महामारी के जैसे समान रूप में घातक है। लोग भोजन और अन्य दवाओं का स्टॉक करने के लिए अपने जीवन को जोखिम में डाल रहे हैं, दैनिक रोजगार करने वाले लोगो के लिए भोजन की उपलब्धता और आवश्यक वस्तुओं को खरीदने के लिए पैसे की कमी के कारण बीमारी से पहले ही जीवन खो देने की कगार पर पहुंचा दिया हैं। हालाँकि सरकार हर नागरिक तक पहुंचने की पूरी कोशिश कर रही हैं, लेकिन जनसँख्या एवं साक्षरता इसमें बहुत बड़ी समस्या खड़ी कर रहे है। इसका उदाहरण हम लोग देहाड़ी मजदूरों का सड़कों पर पलायन के रूप में देख चुके है | सिर्फ समाचार चैनल एवं अन्य सुचना के स्त्रोत के द्वारा दी गयी सूचनाओं के आधार पर हम लोग यह आश्वस्त नहीं हो सकते की प्रत्येक नागरिक के पास इस बंद की स्थिति में खाने पिने का सामान उचित मात्रा में उपलब्ध है |

क्या हम कोरोना से फैलने वाली तबाही को लंबित कर रहे हैं?

शोधकर्ताओं ने पाया कि मनुष्य कोरोना वायरस को महीनों तक वाहक के रूप में बिना किसी की लक्षण के रख सकते, इसका सीधा सा अर्थ है कि यह इस दौरान वह व्यक्ति अन्य लोगों को संक्रमित कर सकता है। इस तरह के जोखिम उन लोगों से पैदा होते हैं जो पहले से ही अपनी मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली के कारण COVID -19 से उबर चुके हैं। वर्तमान में सामाजिक दुरी का पालन करने वाले लोग और लॉक डाउन इस प्रकार से होने वाले प्रसार को सीमित किये हुए है, लेकिन जैसे ही यह लॉक डाउन और सामाजिक वदुरी वाली एतिहात दूर होगी, हम कोरोना महामारी की दूसरी लहर की चपेट में आने के बहुत करीब आ जाएंगे जो कि मौजूदा हाल से भी बदतर होगी। हम सभी इस तरह की स्थिति से निपटने के लिए कोरोना वैक्सीन की उम्मीद कर रहे हैं लेकिन किसी को भी इस बात पर निश्चितत्ता नहीं है की इस कार्य में कितना समय लगने वाला है।

क्या सामूहिक प्रतिरक्षा कोरोना महामारी का समाधान है?

चिकित्सा पत्रिका “सेल” और ऑक्सफोर्ड वैक्सीन समूह के अनुसार “व्यक्तिगत प्रतिरक्षा एक शक्तिशाली शक्ति है जो मेजबान के स्वास्थ्य और रोगज़नक़ के विकास को प्रभावित करती है”। अलग-अलग प्रतिरक्षा के प्रभाव द्वारा रोगजनक के संचरण की गतिशीलता को प्रभावित करने के लिए बड़े पैमाने जो प्रयास होते है उसे सामूहिक प्रतिरक्षा या हर्ड इम्युनिटी या जनसंख्या-पैमाने पर प्रतिरक्षा कहा जाता है

यह कैसे काम करती है ?

अगर पर्याप्त संख्या में लोग किसी बीमारी से ग्रसित हो जाते हैं और इसके खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेते हैं, जिससे ऐसे लोगों को सुरक्षा प्रदान की जा सकती है जो अभी तक प्रतिरक्षित नहीं हैं। इससे यह बात जाहिर है कि कोरोना वायरस के नियंत्रण में सामूहिक प्रतिरक्षा एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। आम तौर पर सामूहिक प्रतिरक्षा तब अच्छी तरह से काम करती है, जब हमारे पास समाज में प्रतिरक्षा पूल विकसित करने के लिए रोगज़नक़ के खिलाफ टीका होता है, बिना टीकाकरण प्रणाली के सामूहिक प्रतिरक्षा काम कर भी सकती है या नहीं | सामूहिक प्रतिरक्षा के ऊपर मानव जाति की रक्षा का दायित्व एक अनजान संभावना के तौर पर वर्तमान स्थिति से भी भयावह हो सकता है ।

कोरोना महामारी से निपटने के लिए डॉक्टर क्या सुझाव देते हैं?

कोरोना वायरस एक संक्रामक बीमारी है जो व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नाक या मुंह से छोटी बूंदों के माध्यम से फैलती है| यह तब फैलती है जब कोई व्यक्ति COVID-19 खांसी या साँस छोड़ता हैऔर ये बूंदें व्यक्ति के आसपास की वस्तुओं और सतहों पर उतरती हैं। अन्य लोग तब इन वस्तुओं या सतहों को छूकर, फिर अपनी आँखों, नाक या मुंह को छूते है तो COVID -19 बीमारी की चपेट में आ जाते हैं।

कोरोना वायरस से सुरक्षा

  • कोरोना वायरस का अब तक कोई इलाज नहीं है और केवल रोकथाम एवं स्व प्रतिरक्षा ही इलाज है।
  • आप कुछ साधारण सावधानियां बरतकर COVID -19 के संक्रमित होने या फैलने की संभावनाओं को कम कर सकते हैं:
  • अपने हाथों को अल्कोहल-आधारित हाथ धोने के घोल से नियमित रूप से अच्छी तरह से साफ करें या उन्हें साबुन और पानी से धोएं।
  • कम से कम 1 मीटर (3 फीट) की दूरी बनाए रखें।
  • आंखों, नाक और मुंह को छूने से बचें।
  • सुनिश्चित करें कि आप, और आपके आस-पास के लोग, अच्छी श्वसन स्वच्छता का पालन करें। इसका मतलब है खांसी या छींक आने पर अपनी मुड़ी हुई कोहनी या टिशू से अपने मुंह और नाक को ढंकना। फिर इस्तेमाल किए गए ऊतक का तुरंत निपटान करें।
  • यदि आप अस्वस्थ महसूस करते हैं तो घर पर रहें। यदि आपको बुखार, खांसी और सांस लेने में कठिनाई है, तो चिकित्सा पर ध्यान दें तथा प्रशासन को इसके बारे में जानकारी करें एवं अपने स्थानीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के निर्देशों का पालन करें।
  • नवीनतम COVID-19 हॉटस्पॉट (शहर या स्थानीय क्षेत्र जहां COVID-19 व्यापक रूप से फैल रहा है) पर अद्यतित रहें। यदि संभव हो, तो ऐसे स्थानों की यात्रा करने से बचें – खासकर यदि आप एक वृद्ध व्यक्ति हैं या आपको मधुमेह, हृदय या फेफड़ों की बीमारी है।
    आगे का रास्ता

आगे का रास्ता

कोरोना वायरस का खतरा वास्तविक है लेकिन यह उतना बड़ा नहीं है की जिससे हम इसे अपने दम पर नहीं लड़ सकते। पिछले 3 महीनों के इसके डेटा को देखकर हम आत्म नियंत्रण द्वारा इसके उन्मूलन को सुनिश्चित कर सकते हैं। हमें अपने आप को इस तरह से तैयार करना होगा कि हमारा व्यवहार एहतियात की तरह दिखें न की प्रतिक्रिया ।

एक जागरूक व्यक्ति द्वारा सूझबूझ से लिया गया निर्णय भयभीत व्यक्ति के निर्णय से बेहतर होता है। कोरोना के डर के बजाय जागरूकता फैलाएं।

यहां तक कि अगर किसी को कोरोना संक्रमण हो भी गया है तो भी घबराने और प्रतिक्रिया की बजाय संतुलित व्यव्हार करते हुए अपने आप को लोगो से दूर रखे एवं पूरी एतिहात बरतते हुए स्वास्थय विभाग तथा संबंधित अधिकारियों को सूचित करें तथा COVID-19 परीक्षण करवाए । ज्यादातर यह सम्भावना रहती है की यह हमारी स्व-प्रतिरक्षा द्वारा ही ठीक हो जाएगा अन्यथा गंभीर चिकित्सा सहायता प्राप्त करने के लिए उचित व्यवस्था करे ।

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1 thought on “भारत की कोरोना प्रतिक्रिया कितनी सही कितनी गलत !

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