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पिछले कुछ वर्षों से, चीन विश्व की अर्थव्यवस्था में एक बड़ी भूमिका निभा रहा है। पिछले सात दशकों में चीन ने अपनी अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए अपनी निर्माण क्षमता और बुनियादी सुविधाओं में वृद्धि की है। चीन में पैदा हुए कोरोना वायरस स्वास्थ्य संकट ने एक विचित्र स्थिति जो की आर्थिक एवं स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है यह स्थिति विश्व अर्थव्यवस्था पर कैसे प्रभाव डालेगी ? चीनी मंदी के वैश्विक प्रभावों के प्रभावों को समझने के लिए हम विश्व अर्थव्यवस्था, चीन की ओर से इसमें योगदान और वर्तमान स्थिति और इसके नियंत्रण के हो रहे प्रयासों की समीक्षा करते हुए जानेंगे ।

विश्व अर्थव्यवस्था एक नज़र में

किसी भी देश की आर्थिक ताकत एक वर्ष में एक राष्ट्र से सभी वस्तुओं और सेवाओं के बाजार मूल्य से तय होती है। आज के अनुसार अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुसार, विश्व अर्थव्यवस्था 185 योगदान वाली देशो की अर्थव्यवस्थाओं से मिलकर बानी है जो 2019 के लिए $ 87,265,226 मिलियन है।

विश्व अर्थव्यवस्था में विभिन्न देशों के योगदान को एक बहुत ही प्रचलित सिद्धांत जिसको Parito Principal या 80 / 20 के सिद्धांत के नाम से भी जाना जाता है के द्वारा आसानी से समझा जा सकता है |
शीर्ष 20 अर्थव्यवस्थाएं कुल विश्व जीडीपी के 70% से अधिक का योगदान देती हैं, जबकि शेष 165 देशों ने विश्व अर्थव्यवस्था के कुल सकल घरेलू उत्पाद का केवल 30% योगदान दिया है।

शीर्ष 20 अर्थव्यवस्थाएं और इसका जीडीपी योगदान 2019

S.N Name of Country GDP In Million USD
1
    United States
   21,439,453.00
2
 China
   14,140,163.00
3
 Japan
     5,154,475.00
4
 Germany
     3,863,344.00
5
 India
     2,935,570.00
6
 United Kingdom
     2,743,586.00
7
 France
     2,707,074.00
8
 Italy
     1,988,636.00
9
 Brazil
     1,847,020.00
10
 Canada
     1,730,914.00
11
 Russia[n 3]
     1,637,892.00
12
 Korea, South
     1,629,532.00
13
 Spain
     1,397,870.00
14
 Australia
     1,376,255.00
15
 Mexico
     1,274,175.00
16
 Indonesia
     1,111,713.00
17
 Netherlands
        902,355.00
18
 Saudi Arabia
        779,289.00
19
 Turkey
        743,708.00
20
  Switzerland
        715,360.00


20 शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं की सूचि का पिछले 30 सालों के अध्ययन से एक बहुत ही दिलचस्प तथ्य सामने आता है की 1980 के दशक से 17 देश लगातार इस सूची में खुद को रख हुए हैं जिसका तात्पर्य यह है कि नए अर्थव्यवस्थाओं के लिए इस सूची में शामिल होना प्र बहुत कठिन है। काफी समय से चीन इस सूची में दूसरे स्थान पर है।

विश्व जीडीपी में चीन का योगदान

IMF की 2019 की वैश्विक आर्थिक रिपोर्ट के अनुसार, चीन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। यह 2006 से वैश्विक आर्थिक विकास में योगदान के मामले में पहले स्थान पर है तथा विश्व के आर्थिक विकास का प्रमुख इंजन बन गया है|

2012 से चीन ने आईएमएफ और विश्व आर्थिक मंच में प्रकाशित एक रिपोर्ट के आधार पर वर्ष 2019 में विश्व अर्थव्यवस्था में अपना योगदान 15.26% से बढ़ाकर 19.24% कर दिया है।

विश्व जीडीपी की तुलना में चीन की जीडीपी वृद्धि

विश्व व्यापार में चीन का योगदान

चीन ने अपने द्वार विश्व के लिए खोल दिए है अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा देने और वैश्विक समृद्धि को बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है तथा विश्व अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण पथप्रदर्शक बन गया है। चीन के आयात में दुनिया के कुल व्यापारिक आयात का 11.37% हिस्सा है और 2018 में इसका निर्यात 13.47% है।

2013 में चीन द्वारा शुरू की गई बेल्ट एंड रोड पहल देशों और क्षेत्रों के बीच गहराई से सहयोग और आम विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

दुनिया के शीर्ष 3 व्यापारी अर्थव्यवस्थाएं

उपरोक्त सूची में शीर्ष 3 विश्व व्यापारियों और विश्व व्यापार में उनके% योगदान को दर्शाया गया है, चीन समग्र प्रदर्शन में एक शीर्ष व्यापारी के रूप में उभरा है इसका आयात, निर्यात से कम है इसलिए चीन के लिए Trade Surplus है जो व्यापार के संदर्भ में अपने वैश्विक दबदबे को साबित करता है।

अधिकांश व्यापार पंडितों ने आम तौर पर अनुमान लगाया था कि निर्यात में वृद्धि का मतलब व्यापार आय के लिए अन्य देशों पर निर्भरता है लेकिन चीन के मामले में यह अलग है। जनवरी 2015 से दिसंबर 2018 तक चीन की वृद्धि में 60% से अधिक इसकी घरेलू खपत का योगदान है। इसका मतलब है कि चीन व्यापार पर अपनी निर्भरता को विकास के स्रोत के रूप में कम कर रहा है जबकि दुनिया चीन से आने वाले माल के लिए अपनी बढ़ती निर्भरता के लिए अधिक उजागर हो गई है। ।

देश या तो चीन के साथ अधिक व्यापार कर रहे हैं या निवेश प्राप्त कर रहे हैं। चीन के लिए दुनिया का यह बढ़ा जोखिम वैश्विक व्यापार पर चीन के बढ़ते प्रभुत्व को दर्शाता है।

चीन की वर्तमान स्थिति

अंतर्राष्ट्रीय खुदरा विक्रेताओं की समूहों ने कोरोना वायरस के चलते चीन में अपने व्यापार को अनिश्चित काल के लिए बंद कर दिया है, कई विदेशी एयरलाइनों ने चीन के लिए उड़ानें बंद कर दी हैं और अंतरराष्ट्रीय होटल श्रृंखलाएं रिफंड की पेशकश कर रही हैं। चीन के प्रमुख व्यापार क्षेत्र कोरोना वायरस महामारी (वुहान) के चलते पिछले कई दिनों से बंद है, जिसने विदेश में सामान बेचने वाले निर्माताओं के लिए समस्याएँ खड़ी कर दी हैं, खरीदार चीन से व्यापार करने के लिए अधिक अनिच्छुक हो रहे हैं।

वित्तीय बाजारों ने भी इस स्वास्थ्य संकट का झटका महसूस किया गया है। दुनिया भर के शेयर बाजार एक महीने पहले की तुलना में कम हैं। पिछले सप्ताह चीन का बाजार लगभग 10% गिर गया। औद्योगिक वस्तुओं की कीमतों पर विशेष रूप से प्रभाव पड़ा है, क्योंकि चीन एक ऐसा महत्वपूर्ण खरीदार है।
कच्चे तेल ने अपने पिछले एक साल के सबसे निचले स्तर को छू लिया है । पिछले दो हफ्तों में इसमें लगभग 15% की गिरावट आई है, चीन की घटती मांग को दर्शाता है, इसके चलते OPAC ने कीमतो में गिरावट को रोकने के प्रयास में उत्पादन में कटौती पर विचार किया है।

चीन का कोरोना वायरस संकट केवल चीन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि व्यापार के मामले में पूरी दुनिया के सामने है

चीन के आर्थिक भविष्य में क्या निहित है और यह पूरी दुनिया को कैसे प्रभावित करेगा ?

कोरोना वायरस के आर्थिक प्रभाव को निर्धारित करने के लिए कुछ भी बोलना अभी समय से पूर्व के आंकलन मात्र है, बहुत कुछ इस बात पर निर्भर करेगा कि चीन मौजूदा नुकसान से कैसे निपटता है। चीन की वृद्धि दर 5.6 % से घटकर 3% रह गई है, जो वर्तमान में वैश्विक अर्थव्यवस्था को .2% से प्रभावित करेगी | इस समय हम एक सकारात्मक विचार के साथ कि चीन वर्तमान स्थिति पर सफलतापूर्वक काबू पा लेगा।

यदि चीन क्षति नियंत्रण में पिछड़ जाता है तो आर्थिक क्षति की आशंका अधिक होती है, क्योंकि यह अपेक्षा से अधिक गंभीर होगी ।

कोरोना वायरस महामारी के बारे में अधिक जानने के लिए कृपया कोरोना वायरस पर हमारा लेख पढ़ें

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