जब हम अपने आस-पास के प्रसिद्ध लोगों को देखते हैं तो सफलता के साथ जुड़े स्याह रंग की उक्ति बहुत ही सत्य प्रतीत होती है आइये इस लेख में हम दो उदाहरणों की मदद से जीवन के इस तथ्य को समझने की कोशिश करें। इस लेख में लिए गए उदाहरणों से द्वारा में उद्देस्य किसी की छवि को ठेस पहुंचना नहीं है बल्कि इन उदाहरणों के माध्यम से एक सफल व्यक्ति के साथ जुड़े कुछ अप्रिय व्यावहारिक सच्चाई को बहार लाना है जो की सफलता के साथ चाहे अनचाहे रूप से जुडी रहती है ।

महात्मा गांधी- वैचारिक खोखलापन लिए एक सफलतम व्यक्तित्व

हमारे देश में महात्मा गांधी सादगी और संघर्ष का प्रतीक हैं। मोहनदास करमचंद गांधी से कैसे वे महात्मा गाँधी बन जाते हैं, यह किसी को बताने की जरुरत नहीं है क्योंकि पूरी दुनिया गाँधीजी के द्वारा भारतीयो लोगो की स्व्तंत्रता के लिए किये गए अनवरत प्रयासो की एक कहानी है इस कहानी के लिखने के लिए गांधी द्वारा किये गए त्याग किसी की सहमति के मोहताज नहीं है

महात्मा गांधी ने भारतीय लोगों के अधिकारों को सुरक्षित रखने के लिए अंग्रेजो से लड़ाई लड़ी और राष्ट्रवाद के प्रतीक बन गए। सन 1915 के उस दिन से लेकर जिससे उनका राजनीतिक करियर हुआ उनकी मृत्यु के अंतिम दिन तक शुरू उनकी लड़ाई चालू रही, वह भारत के लोगों के प्रति प्रतिबद्ध रहे। उनके जीवन के सकारात्मक पक्ष के लिए हम उन्हें सदैव अग्रणी रखते है परन्तु उनके व्यक्तित्व के कुछ नैतिक रूप से कमजोर पहलुओं को को नजरअंदाज करना ही उचित समझते है । किसी के जीवन में सब कुछ अच्छा ही हो यह आवश्यक नहीं है खासकर यह बात महान लोगो के बारे में ज्यादा ध्यान देने योग्य है

युवा महिलाओं के साथ महात्मा गांधी की नग्न नींद  प्रयोग

गाँधी के निजी जीवन को देखने से पता चलता है की उनके वचारो में एक अलग ही खोखलापन था इस बात को उनके बहु चर्चित नग्न नींद के प्रयोग द्वारा समझा जा सकता है| गाँधी जी उम्र के 74 साल में अपनी निजी चिकित्सक सुशीला नायर और अपनी दो भतीजियों आभा और मनु के साथ नग्न शयन के प्रयोग करके अपने व्यक्तित्व के दृढ संकल्प को साबित कर रहे थे | वो नग्न शयन करके अपने ब्रह्मचर्य को सिद्ध करना चाह रहे थे की अगर आपका मन शुद्ध है तोह आपको किसी भी प्रकार का प्रलोभ विचलित नहीं कर सकता | कुछ लोग गाँधी जी के इस प्रयोग को उनकी महनता बता देते है परन्तु अगर आप इसे गाँधी जी के भारतीय संस्कृति वाली विचार धारा से जोड़कर देखते है तोह बहुत ही अनैतिक प्रतीत करते है | हम अक्सर उसके चरित्र की इस विकृति को अनैतिक तरीके से न देखकर अनदेखा करते हैं लेकिन सच्चाई हमेशा कड़वी होती है।

गाँधी जी बनाम सुभाष चंद्र बॉस

सुभाष चंद्र बॉस के साथ गांधी का एक बहुत प्रसिद्ध अहंकारपूर्ण व्यव्हार उनके चरित्र की गहरी छटा को उजागर करता है। 1939 में, जब गाँधी जी समर्थित सीतारमैय्या को हराकर नेताजी सुभाष बोस को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अध्यक्ष चुना गया, तो गाँधी जी को यह बात नागवार गुजारी की कोई कैसे उनके रहते उनके विचारो से मतभेद रख सकता है | गांधी इस तथ्य को स्वीकार नहीं कर सके कि सुभाष चंद्र बोस की छवि कुछ मामलो में उनसे भी आगे थी | गाँधी जी ने सीतारमैय्या की हार को अपनी निजी हार करार दे दिया और इसके चलते 13 सदस्यों ने अपना इस्तीफा दे दिया यह सब देखकर नेताजी बहुत आहत हुए और अपने पद से इस्तीफा दे दिया | यह प्रसंग गांधीजी के व्यावहारिक जीवन की संकीर्ण सोच एवं अहंकारिता को दर्शाते है जो की किसी सफल व्यक्तित्व का एक स्याह रूप दिखाता है | गाँधी जी ने अपने जीवन में राजनीती को इतना महत्व दिया की उनका परिवार, दोस्त, बच्चे और यहां तक ​​कि नैतिकता भी इस दौड़ में पीछे रह गयी |

पाब्लो पिकासो – एक सफल कलाकार एवं असफल व्यक्तित्व

अब हम एक ऐसे व्यक्तित्व के माध्यम से सफलता के काले रंग के पहलु को समझने की कोशिश करते है जिसके हमारे देश से कोई सम्बन्ध नहीं है | पाब्लो पिकासो 20 वीं सदी के महानतम कलाकारों में से एक हैं। पिकासो को महान बनाने के पीछे न केवल उनकी अनगिनत कालकृतियाँ है बल्किउन्होंने इसे कैसे निर्मित किया अधिक महत्वपूर्ण है । हम में से अधिकांश लोगो का अपने जीवन साथी के साथ जीवन भर एक प्रार्थमिकता का रिश्ता होता है जो समय समय पर अनगिनत उचार चढ़ाव से गुजरता रहता है और विभिन्न अवधियों के दौरान विभिन्न प्रकार के शौक और रुचियों के साथ साथ चलता रहता है। पिकासो का जीवन इसके एकदम उलट था। उनका प्राथमिक संबंध उनकी कला के साथ था, जबकि उनके प्रेम का शौक समय समय के साथ बदलता रहता था प्रेम को उन्होंने यहां और वहां एक अवधि के लिए किसी वस्तु की तरह प्रयोग किया था। पिकासो ने चित्रकला के क्षेत्र में अभूतपूर्व काम किया लेकिन 3 असफल विवाहों एवं अनगिनत अनैतिक विवाहेतर मामलों के साथ प्रेम जीवन में बुरी तरह असफल रहे। उनकी अपने निजी जीवन की यह विफलता उन्हें एक नैतिक इंसान के रूप में थोड़ा कम आंकती है लेकिन फिर भी उनकी कला किसी भी चित्रकार के लिए सदैव प्रेरणा का स्त्रोत रहेगी। पिकासो का एक सफल कलाकार एवं असफल नैतिक व्यक्तित्व होना उनके सफलता के काले रंग को उजागर करता है |

उपरोक्त दो बिलकुल अलग अलग तरह के उदाहरणों के माध्यम से एक विचार को आपके सामने रखना है कि जैसे जैसे व्यक्ति सफलता की और अग्रसर होता है उसे कुछ न कुछ बलिदान देना होता है चाहे बलिदान आपके निजी व्यक्तित्व का ही क्यों न हो और यह बात लगभग हर क्षेत्र में सच है।

क्या सफलता के दूसरे पहलु का रंग कला होना आवश्यक है ?

कुछ बुद्धिजीवी यह मत रखते है की सफल होने के लिए बुरा होने की जरुरत नहीं है और मई इस बात से पूर्ण रूप से सहमत हूँ |
सफलता को परिभाषित करना उतना ही कठिन है जितना सफ़ेद जो रंग है। हम में से कुछ अपने बच्चों को अच्छे स्कूल ,कॉलेज में पढ़ते हुए बड़े होते देखने को ही सफलता मान लेते है और हममें से कुछ लोग नवीनतम संसाधनों और सुविधाओं को अपने सफल होने का प्रमाण मानते है | यह कही भी नहीं लिखा है की आपको सफल बनाने के लिए बुरा बनाना पड़ेगा। यह कुछ ऐसा है जो हम अनुभव करते हैं अपने आपको वित्तीय सुरक्षा देना या फिर एक अच्छे शरीर का कामना करना बहुत ही साधारण और युक्तिसंगत है| हर कोई उन चीजों को चाहता है। क्या आप अपने परिवार के बजाय हर दिन अपने दफ्तर में अतिरिक्त दो घंटे काम पर बिताना चाहते हैं? क्या आप जल्दी उठकर भ्रमण के लिए अपनी सुबह की नींद को छोड़ना चाहते है ? प्रत्येक व्यक्ति का अपना अलग तरीका होता है और उनकी प्राथमिकताएं भी उसी के अनुरूप होती है अब आपको यह तय करना होगा कि आपके लिए सबसे अच्छा क्या है और उसके साथ उसका कोनसा नकारात्मक पहलु जुड़ा हुआ है नकारात्मकता को नजरअंदाज करना अच्छी रणनीति नहीं होती है। सब चीज़ो की एक कीमत होती है चाहे वोह सफलता ही क्यों ना हो अब हमे यह तय करना है की इसके बदले में आप इस सौदे में क्या खोना चाहते है और क्या पाना चाहते हैं।

सफल जीवन-एक अपूर्ण संतुलन

हमारे जीवन को एक सही संतुलन की जरूरत है, जो चीजें लोगों को एक क्षेत्र में महान बनाती हैं, वे अक्सर उन्हें दूसरों क्षेत्र में दुखी करते हैं। सफलता को हम अपनीअभिरुचि के अंतिम चरम के रूप में परिभाषित कर सकते है, जितना अधिक हम एक ही एकपक्ष आयाम पर ध्यान केंद्रित करते हैं उतना अधिक हम जीवन के संतुलन से दूर होते जाते हैं अतः अपनी महत्वकांक्षाओं को अपने जीवन के अमूल्य पहलुओं के साथ सामंजस्य में रखने का प्रयास करे ताकि आप एक सम्पूर्ण व्यक्तित्व बने न की सिर्फ एक सफल इंसान |

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