भारत देशव्यापी लॉकडाउन के दूसरे चरण में है। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने 3 मई 2020 तक लॉकडाउन का विस्तार है । कई क्षेत्रों (पूंजी बाजार, विनिर्माण, सेवा क्षेत्र, कृषि और परिवहन) में भारी आर्थिक नुकसान के बावजूद, सरकार ने कोरोना महामारी से निपटने के लिए लॉकडाउन को बनाए रखने के लिए एक केंद्रीकृत निर्णय लिया। हालांकि, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने संकेत दिया कि स्थिति की गंभीरता के आधार पर विकेंद्रीकृत लॉकडाउन निकास रणनीति लागू होगी जिसके लिए राज्यों का मूल्यांकन 20 अप्रैल तक कर लिया जाएगा |

भारत की कोरोना लॉकडाउन निकास की रणनीति

भारत में कोरोना की वर्तमान स्थिति

विश्व स्वास्थ्य संगठन और स्वतंत्र अनुसंधान संगठन के अनुसार भारत ने विकसित देशों की तुलना में सीमित संसाधनों के साथ कोरोना को अपनी विशाल आबादी के एक छोटे हिस्से तक सीमित करके कोरोना संकट में एक जबरदस्त काम किया है। भारत में कोरोना मामलों की कुल संख्या 12546 तक पहुंच गई है मर्त्यु का आंकड़ा 423 है। कुछ राज्य नए कोरोना मामलों में तेजी से वृद्धि कर रहे हैं, जबकि कुछ राज्य अभी भी इस जानलेवा बीमारी से अछूते हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 170 जिलों को कोरोना हॉटस्पॉट और 207 जिलों को संभावित हॉटस्पॉट के रूप में चिह्नित किया है, 325 जिलों ने अभी तक किसी भी कोरोना मामले की रिपोर्ट नहीं की है।

क्यों हम लॉक-डाउन आगे नहीं बढ़ा सकते ?

सही मायनों में लॉकडाउन समय की खरीद की एक रणनीति है इस उम्मीद में कि वैज्ञानिक कोरोनावायरस को रोकने के लिए कुछ टीके विकसित कर लेंगे । कोरोनावायरस महीनों या वर्षों के लिए पूरे विश्व को बंधक नहीं बना सकता है इस उम्मीद में कि किसी दिन हम इसके खिलाफ एक इलाज की खोज करेंगे। हाल ही में जारी की गयी अधिसूचना में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा किकोरोना के लिए एक प्रभावी टीका बनाने में 12 महीने तक लग सकते है। हर देश के पास अनिश्चित घटनाओं से सामना करने के लिए कुछ बफर स्टॉक होता हैं, लेकिन ये बफर स्टॉक केवल कुछ दिनों या महीनों तक चल सकता हैं और आखिरकार, हमें अपनी अस्तित्वगत लड़ाई को बनाए रखने के लिए नियमित जीवन को फिर से शुरू करना होता है ।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पहले से ही अपंग हो चुकी है, केवल भगवान जानता है कि यह कब वापस पटरी पर आएगी । हमारे देश की 70% से अधिक आबादी रोजगार के लिए असंगठित क्षेत्र पर निर्भर है जिसमें कोई पुनरुद्धार की रणनीति नहीं है। अगर हम इस लॉकडाउन का विस्तार करते हैं तो हमे इस आर्थिक मंदी से निकलने में न जाने कितना समय लग जाएगा| देश कितने वर्ष पीछे चला जाएगा ? 135 करोड़ नागरिकों वाले देश के लिए यह बहुत मुश्किल होगी।

राज्यों ने लॉकडाउन निकास योजना प्रस्तावित की

केंद्र सरकार कोरोना प्रसार के लिए कमजोर कोरोना हॉट स्पॉट और संभावित लाल क्षेत्रों की पहचान कर रही है। अब तक 170 हॉट स्पोर्ट और रेड जोन की पहचान की जा चुकी है, 20 अप्रैल 2020 तक सरकार सभी राज्य क्षेत्रों को कवर करने के लिए उन्हें अलग-अलग जोन में चिन्हित कर देने के लिए कटिबद्ध है

कोरोना निकास प्लान- 3 संभावित जॉन

20 अप्रैल के बाद केंद्र सरकार संभवत: पूरे देश को नीचे दिए गए 3 प्रकार के क्षेत्रों में सूचीबद्ध करेगी

रेड ज़ोन: – ये क्षेत्र कोरोना बीमारी से सबसे प्रभावित स्थान हैं। नए नए कोरोना संक्रमण के केसेस आ रहे है | 3 मई तक इन ज़िलों में पूर्ण लॉकडाउन प्रभावी होगा।

ऑरेंज ज़ोन: – इन क्षेत्रों में कोई नया मामला तो नहीं है लेकिन बीमारी कुछ हद तक फैली हुयी है | कुछ आर्थिक गतिविधियों के लिए सशर्त लॉकडाउन में छूट होगा। किसी भी प्रकार की सार्वजनिक गतिविधियों की अनुमति नहीं दी जाएगी।

ग्रीन जोन: – इन क्षेत्रों में कोई कोरोना मामले नहीं। आर्थिक गतिविधियों के साथ साथ अधिकांश सामान्य सार्वजनिक गतिविधियों को सामान्य रूप से फिर से शुरू किया जाना है।

21 अप्रैल के बाद लॉकडाउन को आसान बनाने वाले राज्य

जैसे ही केंद्र सरकार ने क्षेत्रों के वर्गीकरण के साथ, कोरोना लॉकडाउन चरण 2 के लिए दिशानिर्देश जारी किए। कई राज्यों ने लॉकडाउन से बाहर निकलने की रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है। हिमाचल प्रदेश , बिहार और राजस्थान सरकार ने संकेत दिए हैं कि वे केंद्र सरकार के दिशानिर्देशों के अनुसार आम लोगों और वाणिज्यिक गतिविधियों को कुछ राहत प्रदान करेंगे। ये सभी छूट सशर्त होंगी और नए कोरोना मामले का पता लगाने से तुरंत समाप्त कर दिया जाएगा और स्थानीय अधिकारियों द्वारा निर्दिष्ट समय के लिए एक पूर्ण लॉकडाउन प्रभावी होगा।

21 अप्रैल से फिर से शुरू की जाने वाली संभावित गतिविधियाँ

20 अप्रैल के मूल्यांकन के बाद लॉकडाउन से बाहर निकलने की योजना को औपचारिक रूप दिया जाना अभी बाकी है, हालांकि राज्य सरकारें चरणबद्ध तालाबंदी से बाहर निकलने के लिए निम्न गतिविधियों (आवश्यक सेवाओं के अलावा) के ऊपर विचार कर रहीं है

  • न्यूनतम कर्मचारियों वाले सरकारी कार्यालय (लोक निर्माण विभाग)
  • कृषि संबंधी गतिविधियाँ (मंडी, कृषि उपकरण उद्योग, बीज और उर्वरक बिक्री बिंदु)
  • ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित विनिर्माण इकाइयाँ
  • ग्रामीण रोजगार योजना (मनरेगा)
  • कोरियर सर्विसेज
  • ऑनलाइन डिलीवरी और ई-कॉमर्स
  • आतिथ्य उद्योग (होटल, लॉज, होम स्टे)
  • वाहनों की सीमित आवृत्ति के साथ परिवहन

सबसे अधिक संभावना है कि इन गतिविधियों को बुनियादी एहतियाती उपायों एवं सामाजिक दुरी के अभ्यास के साथ अनुमति दी जाएगी।

लॉक-डाउन 2.0 के आगे का रास्ता क्या है ?

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने  ऐसे संकेत दिए है की कोरोना जल्द ही समाप्त होने वाली बीमारी नहीं हैं। यह लाइलाज बीमारी अत्यधिक संक्रामक है एवं प्रभावी इलाज के बिना लंबे समय तक सार्वजनिक जीवन का हिस्सा  रहने वाली है । कोरोना संकट का विस्तार कई महीनों तक हो सकता है जब तक कि हम इसके खिलाफ एक प्रभावी इलाज या वैक्सीन नहीं ला पाते हैं। इस बीमारी से एकमात्र प्रभावी निकास रणनीति सोशल डिस्टेंसिंग और बुनियादी सावधानियां हैं।

आइए इस लड़ाई में हमारी सरकार का समर्थन करें और ईमानदारी से इस कोरोना दानव के प्रसार को रोकने के लिए सभी एहतियाती उपायों और सामाजिक दूरियों का पालन करें।

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