कैरियर चुनाव का निर्णय बहुत कठिन होता है और यह हमारे जीवन की दिशा तय करता है। ये निर्णय इतने शक्तिशाली हैं कि हमारी खुशी और भलाई उन पर निर्भर है। इस तरह का निर्णय लेना हममे से कुछ के लिए कुछ बच्चों का खेल है और कुछ के लिए जीवन और मृत्यु की स्थिति जैसा असमंजस है। हम हमेशा इस बारे में भ्रमित होते हैं कि हमारा दिल क्या कहता है और हमारा व्यावहारिक मस्तिष्क क्या कहता है? यदि आप इसी तरह की उलझन में फसे हुए हैं तो यह लेख आपके लिए है।चलिए कोशिश करते है यह समझने की हमारा दिल क्या कह रहा है और हमारा दिमाग क्या बोलता है ?

दिल और दिमाग कैसे काम करता है ?

लाखों सालो की विकास यात्रा तय करने के बाद हमारा शरीर इस तरह से विकसित हुआ है कि हम प्रत्येक वस्तु के बारे में बहुआयामी सोचते हैं, बहुत बार हम नोटिस नहीं करते हैं लेकिन हम इसे हर समय करते हैं। वास्तव में दिल कभी कुछ नहीं कहता, इसका सिर्फ एक पंप है जिसका काम शरीर में रक्त पंप करना है और यह केवल उसी तक सीमित है। जब भी निर्णय लेने स्थिति हमारे सामने आती है तो दो राय हमारे दिमाग में आती हैं एक जिसे हम दिल की भावना कहते हैं और दूसरा है हमारा मस्तिष्क , दोनों ही भावनाएँ मस्तिष्क से हैं लेकिन हम एक को हृदय कहते हैं और दूसरे को दिमाग |

जब हमारी भावनाएं हमारी राय को प्रभावित करती हैं तो हम इसे दिल की भावना या मन की आवाज़ कह देते हैं और जब भी हमारा विश्लेषणात्मक मस्तिष्क एक विचार हमारे सामने रखता है तो हम इसे मस्तिष्क की बात कहते हैं।

असहज या आनंददायक स्थिति में होने पर हमारा हृदय असामान्य क्यों होने लगता है?

हमारा पूरा शरीर ऑक्सीजन पर चलता है, प्रत्येक भाग को इष्टतम दक्षता में काम करने के लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है, इसलिए जब भी कुछ अवांछित स्थिति पैदा होती है तो उस विशेष अंग को अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है और हमारा मस्तिष्क हमारे हृदय को आवश्यक रक्त की आपूर्ति करने के लिए निर्देशित करता है जिसे हम दिल की बड़ी हुयी धड़कन के रूप में देखते हैं या इसे हम प्यार से दिल का धक्क से रह जाना भी कहते है |

कैरियर निर्णय प्रक्रिया

हमारे मस्तिष्क के बहु-दृष्टिकोण दृष्टिकोण को समझने के लिए, हमें अपने मस्तिष्क की कार्यप्रणाली की मूल बातों को समझना होगा। हमारा मस्तिष्क किसी भी विचार कर विश्लेष दो अलग-अलग आयामों में करता है |

  1. भावनात्मक विचार- शारीरिक विचार (दिल की भावना)
  2.  विश्लेषणात्मक विचार- मस्तिष्क के विचार

इन दोनों आयामों को एक एक करके जानते है |

भावनात्मक विचार- शारीरिक विचार: –

हम मानव इस पूरे ब्रह्मांड में सबसे विकसित जीव हैं जो विभिन्न रूपों में अपनी भावनाओं को व्यक्त कर सकते हैं (शारीरिक हावभाव, संकेत, भाषा आदि) , भावनात्मक विचार हमारे शारीरिक अनुभवों पर आधारित होते है और प्रकृति में बहुत स्थिर होते हैं। एक शारीरिक भावना या विचार बदलने के लिए थोड़ा समय एवं प्रयास लगता है। इसलिए जब भी हमें भावनात्मक विचार आता है तो हम अपने दिल की बात कहते हैं क्योंकि हम अपने पिछले समान अनुभव के आधार पर इस विचार के साथ सहज महसूस करते हैं।

दिल की आवाज़ या भावनात्मक विचार हमारे मस्तिष्क के ही विचार होते हैं इसकी प्रतिक्रिया करने की समय ज्यादा होती होती है जो हमें उन्हें स्वीकार करने के लिए अधिक आरामदायक एवं सहज बनती है।

क्या भावनात्मक विचार गलत हैं?

भावनाएं हमारे व्यक्तित्व को आकार देने और निर्णय लेने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। भावनात्मक विचार पिछले अनुभवों से उत्पन्न होते हैं इसलिए हर समय सही नहीं हो सकते क्योंकि हर स्थिति में आपके पिछले अनुभव कारगर साबित नहीं होते है खासकर तब जब आपके सामने एक नयी स्थिति पैदा होती हैं।

विश्लेषणात्मक विचार- मस्तिष्क के विचार

हमारा मस्तिष्क विभिन्न स्रोतों से बेशुमार सूचनाएं संग्रहीत करता है और अधिकांश समय हम उन सूचना के स्रोत को नोटिस भी नहीं करते हैं। यह सूचनाएं हम पाठय सामग्री , वीडियो, दृश्य, अनुभव, योजना या कईअन्य संयोजनों के रूप में हो सकता है।

जब हमें कोई निर्णय लेने की आवश्यकता होती है तो यह कैरियर या व्यक्तिगत जीवन या जीवनसाथी इत्यादि से सम्बंधित होता है,तो हमारा विश्लेषणात्मक मस्तिष्क हमारे दिमाग में पैदा होने वाले विचारों हर एक विचार के पीछे बहुत सारे तर्क रखता हैं।

उदाहरण के लिए हमें करियर के बारे में निर्णय लेने की आवश्यकता है तो हमारा मस्तिष्क निम्न बातो पर विश्लेषण करता है

  1. हमारी वर्तमान स्थिति क्या है ?
  2. आपको इस व्यवसाय / करियर की आवश्यकता क्यों है ?
  3. आप इसे भविष्य में कैसे देखते हैं ?
  4. क्या यह निर्णय आपकी असुरक्षा को समाप्त करने वाला है (यदि कोई हो)
  5. यह आपके आस-पास के व्यक्तियों को कैसे प्रभावित करेगा ?

इन सब विश्लेषण कारको को देखने के बाद हम कह सकते हैं कि हमारा मस्तिष्क विभिन्न मोर्चे पर तुरन्त विश्लेषण करता है और प्रत्येक कारक को महत्वपूर्ण मानने के लिए सूचनाएं देता रहता है। अगर कोई नौकरी की सुरक्षा पर बहुत ध्यान देता है, तो हमारा मस्तिष्क नौकरी की सुरक्षा से संबंधित सभी आंकड़े देगा और एक विकल्प सुझाएगा जो इस प्राथमिक चिंता को पूरा करता है |

हमारे मस्तिष्क के कामकाज की इस व्याख्या से अब हम आसानी से समझ सकते हैं कि निर्णय लेने में हमारा दिल और दिमाग कैसे काम करता है।

भावनात्मक विचार स्वभाव में धीमे होते हैं और हमेशा विश्लेषणात्मक विचारों का पालन करते हैं। कभी-कभी भावनाओं को नियंत्रण में लाने के लिए समय लगता है लेकिन यह हमेशा हमारे मस्तिष्क के विश्लेषणात्मक मार्ग का अनुसरण करेगा।

हम करियर के रूप में क्या चुनें ?

अब तक हम समझ गए कि कैसे हमारे मस्तिष्क के द्वारा दी गयी हर एक राय के पीछे हमारे बहुत से विचार होते है, हालांकि हम अभी भी इस बात को पूर्ण रूप से समझ नहीं पा रहे की सही करियर का चुनाव करने का क्या तरीका हैं। हम वास्तव में कुछ पाना चाहते है लेकिन आर्थिक या सामाजिक दृष्टिकोण के चलते कुछ और रास्ता चुन लेते है ।

एक आर्थिक समृद्ध कैरियर का चुनाव या एक ऐसे कैरियर चुनना जहां आप वास्तव में खुश महसूस करते हैं, दोनों ही अपनी अपनी जगह ठीक है इसमें हम किसी भी निर्णय सही या गलत निर्णय नहीं कह सकते हैं

कैरियर निर्णय लेना

मनुष्य पृथ्वी पर जीवित सभी जानवरों में सबसे बुद्धिमान हैं, परन्तु साथ ही साथ सबसे अधिक भ्रमित प्रजातियां भी हैं क्योंकि हमारे पास जो मस्तिष्क है वह ऐसा कुछ नहीं है जिसे हम पूरी तरह से समझते हैं। इसकी कार्यप्रणाली को समझने ने हर एक व्यक्ति को अलग अलग समय लगता है और जैसे ही हम अपने मस्तिष्क और उसके कार्यों को अच्छी तरह समझने लगते हैं तब हमारे लिए सब कुछ आसान हो जाता है।

करियर संबंधी निर्णय लेते समय निम्नलिखित बातों पर विचार करें और अपने मस्तिष्क को सच्चाई से जवाब देने का प्रयास करें। अगर यह काम आप पूर्ण सच्चाई से करते करते है तो मष्तिस्क आपको केवल एक विकल्प देगा जो आपके लिए हमेशा सही होगा

  1. क्या यह ऐसा कुछ है जिसे आप वास्तव में खुद को खुश करते हुए देखते हैं?
  2. क्या यह कैरियर आप आजीविका प्राप्त करने के लिए चुन रहे हैं या अपना जीवन जीने के लिए?
  3. आप क्या गर्व महसूस करेंगे (अपने माता-पिता, परिवार, समाज को छोड़कर)

यदि आप उपर्युक्त 3 प्रश्न का सच्चाई से उत्तर देते हैं तो आपको अपना उत्तर मिल जाएगा।

इस लेख में व्यक्त सुझाव और राय लेखक की अपनी व्यक्तिगत राय हैजो जीवन के प्रति उनके अनुभव तक सीमित हैं।

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