केंद्र सरकार ने निजी क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों के कल्याण के लिए बड़ा कदम उठाते हुए टर्मिनेटेड कर्मचारी कल्याण विधेयक 2020 संसद में प्रस्तावित किया है । यह विधेयक उन कर्मचारियों के लिए कल्याणकारी सेवाएं प्रदान करेगा जिन्हें नीचे दी गई शर्तों में के अनुसार नियोक्ताओं द्वारा नौकरी से बर्खास्त कर दिया है

सेवा समाप्त कर्मचारी कल्याण विधेयक 2020

सरकारी नौकरी के घटते अवसर और निजी कंपनियों के रोजगार के क्षेत्र में बढ़ते योगदान को देखते हुए निजी क्षेत्र में काम कर रहे कर्मचारियों के हितों की रक्षा एवं कल्याण का सवाल उठाना स्वाभाविक है । आज कल के भौतिकवादी योग में प्राइवेट कम्पनियाँ दिन रात अधिकतम प्रॉफिट कमाने में लगी है अवं इसी भागदौड़ में एक आम कर्मचारी को हमेशा अपनी नौकरी जाने का डर सताता रहता है | एक निजी कर्मचारी के लिए चीजें तब और बदतर हो जाती हैं जब वह बिना किसी स्पष्टीकरण के हाथ में गुलाबी पर्ची प्राप्त करता है जिसपे बड़े अक्षरों में लिखा होता है की अब हमे आपकी जरुरत नहीं है यह एक क्षण उन्हें निशब्द छोड़ देता है उनके सामने अपने परिवार तथा बच्चो की परवरिश करना भी एक अभूतपूर्व चुनौती बन जाता है।

टर्मिनेटेड कर्मचारी कल्याण विधेयक टर्मिनेटेड कर्मचारियों को सुनिश्चित आय के साथ न्यूनतम नौ महीने का समय और चिकित्सा लाभ भी प्रदान करेगा जो उन्हें अपने परिवार के मौजूदा कार्यकर्म को परेशान किए बिना खुद को नए रोजगार के लिए आश्वस्त करने के लिए पर्याप्त समय देगा।

वर्तमान में ऐसा कोई कानून नहीं है जो किसी निजी प्रतिष्ठान के कर्मचारियों को रोजगार से निकले जाने में कोई राहत देता हो

सेवा समाप्त कर्मचारी बिल के पात्रता मानदंड

TEWB 2020 निजी क्षेत्र के उस कर्मचारी के लिए लागू होगा, जिसका रोजगार संगठन के समापन या स्थापना के कारणों से समाप्त हो गया है –

  • आर्थिक मंदी
  • संबंधित क्षेत्र में प्रौद्योगिकी में बदलाव
  • मालिक या निदेशक स्थापना के मामलों का प्रबंधन करने वाले दिवालिया हो जाते हैं
  • किसी भी अदालत के आदेश नियोक्ता को कंपनी संचालन बंद करने के कारण
  • घाटे का बढ़ना और व्यवसाय को आगे बढ़ाने में असमर्थ होने के कारण
  • सरकारी नीति में बदलाव नियोक्ता कंपनी के काम को सीमित होने के कारण

एक सेवा समाप्त कर्मचारी कौन है ??

इस विधेयक के तहत उल्लिखित परिभाषा के अनुसार, किसी कर्मचारी का मतलब है कि कोई भी कर्मचारी जो किसी भी नियोक्ता द्वारा नियोजित था, चाहे वह नियमित या अस्थायी आधार पर हो या आकस्मिक रूप से या अनुबंध के आधार पर और जिसकी सेवाएं ऐसे नियोक्ता द्वारा समाप्त की गई हों।

उपर्युक्त श्रेणी में आने वाले कर्मचारी बेरोजगारी मुआवजा स्वास्थ्य बीमा लाभ या किसी अन्य लाभ के हकदार होंगे जो केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित किया जा सकता है। अगर इस तरह के लाभ कर्मचारी-नियोक्ता समझौते का हिस्सा नहीं हैं, तो नौ महीने के लिए या जब तक वह कहीं और कार्यरत नहीं हो जाता, तब तक जो भी पहले हो।

सेवा समाप्त कर्मचारी कल्याण के लिए कॉर्पस फंड

  • प्रत्येक निजी क्षेत्र का नियोक्ता संगठन के शुद्ध लाभ से कर्मचारी कल्याण के लिए एक कोष बनाएगा। यह किसी भी वित्तीय वर्ष के लिए शुद्ध लाभ का कम से कम 5% होना चाहिए।
  • कॉर्पस फंड को बनाए रखने के उद्देश्य से नियोक्ता किसी भी संगठन, व्यक्ति अथवा ट्रस्ट से योगदान प्राप्त कर सकता है।
  • केंद्र सरकार इस संबंध में कानून द्वारा संसद द्वारा किए गए उचित विनियोग के बाद, इस अधिनियम के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए पर्याप्त धनराशि प्रदान करेगी।

अब क्या स्थिति है?

भारतीय संविधान सभी नागरिको के बीच समानता की भावना की कामना करता है और इस विधेयक के आने से यह साबित होता है की समानता का अधिकार सिर्फ कागजो तक ही सिमित नहीं है यह नया बिल निश्चित रूप से समानता की भावना एवं अधिकार क्षेत्र को बढ़ाएगा। संसदीय बहस के दौरान इस विधेयक में संशोधन की काफी संभावनाएं है परन्तु यदि इस विधेयक की समानता वाले सन्देश को जीवित रखा जाता है उस स्थिति में भी यह किसी वरदान से कम नहीं होगा यह निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के कल्याण के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा।

Note : फिलहाल यह बिल संसद में मंजूरी के लिए लंबित है।

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